राम प्रसाद बिस्मिल की संपूर्ण जीवनी हिंदी में पढ़ें। जानिए उनके जन्म, परिवार, बचपन, शिक्षा, आर्य समाज का प्रभाव, देशभक्ति की प्रेरणा, क्रांतिकारी जीवन की शुरुआत और हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) की स्थापना में उनकी भूमिका की विस्तृत एवं तथ्यात्मक जानकारी।
INTRODUCTION
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास अनेक ऐसे वीरों के साहस, त्याग और बलिदान से भरा हुआ है, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता को अपने जीवन से भी अधिक महत्व दिया। उन महान क्रांतिकारियों में राम प्रसाद बिस्मिल का नाम अत्यंत सम्मान और गर्व के साथ लिया जाता है। वे केवल एक निर्भीक क्रांतिकारी ही नहीं थे, बल्कि एक उत्कृष्ट कवि, लेखक, संगठनकर्ता और प्रेरणादायक विचारक भी थे।

राम प्रसाद बिस्मिल ने युवाओं में राष्ट्रभक्ति की भावना जगाने, क्रांतिकारी आंदोलन को संगठित करने और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष की रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जीवन साहस, अनुशासन, वैचारिक स्पष्टता और राष्ट्र के प्रति पूर्ण समर्पण का अनुपम उदाहरण है।
20वीं शताब्दी के प्रारंभ का भारत
19वीं शताब्दी के अंतिम वर्षों और 20वीं शताब्दी के प्रारंभ में भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था। अंग्रेज़ी सरकार की आर्थिक नीतियों, राजनीतिक दमन और सामाजिक असमानताओं के कारण जनता में असंतोष लगातार बढ़ रहा था।
इसी काल में एक ओर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस संवैधानिक सुधारों की दिशा में कार्य कर रही थी, वहीं दूसरी ओर अनेक युवा यह मानने लगे थे कि केवल याचिकाओं से स्वतंत्रता प्राप्त नहीं होगी। परिणामस्वरूप देश के विभिन्न भागों में गुप्त क्रांतिकारी संगठनों का गठन होने लगा। राम प्रसाद बिस्मिल इसी नई क्रांतिकारी पीढ़ी के प्रमुख नेताओं में उभरे।
जन्म और परिवार
राम प्रसाद बिस्मिल का जन्म 11 जून 1897 को उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में हुआ था।
उनके पिता का नाम मुरलीधर और माता का नाम मूलमती देवी था। उनका परिवार सामान्य आर्थिक स्थिति वाला, धार्मिक और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं में विश्वास रखने वाला था।
बचपन से ही उनके माता-पिता ने उन्हें सत्य, ईमानदारी, अनुशासन और आत्मसम्मान जैसे मूल्यों की शिक्षा दी। इन संस्कारों का उनके व्यक्तित्व और भविष्य के निर्णयों पर गहरा प्रभाव पड़ा।
बचपन
राम प्रसाद बिस्मिल बचपन से ही तेज़ बुद्धि, जिज्ञासु और आत्मसम्मानी स्वभाव के थे। उन्हें अध्ययन के साथ-साथ शारीरिक व्यायाम और खेलों में भी विशेष रुचि थी।
किशोरावस्था में उन्होंने देश की राजनीतिक परिस्थितियों और स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित घटनाओं को समझना शुरू किया। विदेशी शासन के कारण भारतीयों के साथ होने वाले अन्याय ने उनके मन में गहरा प्रभाव छोड़ा और धीरे-धीरे राष्ट्रभक्ति की भावना प्रबल होती गई।
शिक्षा
राम प्रसाद बिस्मिल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा शाहजहाँपुर में प्राप्त की। उन्होंने हिंदी, उर्दू और संस्कृत का अध्ययन किया तथा बाद में अंग्रेज़ी का भी ज्ञान अर्जित किया।
उन्हें साहित्य पढ़ने और लिखने का विशेष शौक था। इतिहास, धर्म, दर्शन और राष्ट्रवादी विचारों से संबंधित पुस्तकों का अध्ययन उन्होंने युवावस्था में ही शुरू कर दिया था। आगे चलकर यही अध्ययन उनके वैचारिक विकास और क्रांतिकारी सोच का आधार बना।
आर्य समाज का प्रभाव
राम प्रसाद बिस्मिल के जीवन में आर्य समाज और विशेष रूप से स्वामी दयानंद सरस्वती की पुस्तक ‘सत्यार्थ प्रकाश’ का अत्यंत गहरा प्रभाव पड़ा।
इस ग्रंथ ने उनमें आत्मसम्मान, राष्ट्रप्रेम, सामाजिक सुधार और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की भावना को मजबूत किया। आर्य समाज के विचारों ने उन्हें सत्य, स्वावलंबन और देशभक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
यही वैचारिक आधार आगे चलकर उनके क्रांतिकारी जीवन का महत्वपूर्ण स्तंभ बना।
देशभक्ति की प्रेरणा
1905 के बंग-भंग आंदोलन, राष्ट्रवादी साहित्य और देशभर में बढ़ती स्वतंत्रता की चेतना ने राम प्रसाद बिस्मिल को गहराई से प्रभावित किया।
उन्होंने यह महसूस किया कि भारत को स्वतंत्र कराने के लिए केवल भाषणों और याचिकाओं से अधिक प्रभावी प्रयासों की आवश्यकता है। धीरे-धीरे उनका झुकाव उन युवाओं की ओर हुआ जो संगठित होकर ब्रिटिश शासन का सक्रिय विरोध कर रहे थे।
उनका विश्वास था कि स्वतंत्रता प्रत्येक भारतीय का जन्मसिद्ध अधिकार है और उसके लिए हर प्रकार का त्याग स्वीकार किया जा सकता है।
क्रांतिकारी जीवन की शुरुआत
युवावस्था में राम प्रसाद बिस्मिल क्रांतिकारी गतिविधियों से जुड़े और समान विचारधारा वाले युवाओं के संपर्क में आए। उन्होंने संगठन निर्माण, गुप्त बैठकों और राष्ट्रवादी साहित्य के माध्यम से युवाओं को जागरूक करना शुरू किया।
वे केवल साहसी ही नहीं, बल्कि उत्कृष्ट योजनाकार भी थे। संगठन, अनुशासन और गोपनीयता को वे क्रांतिकारी आंदोलन की सफलता का आधार मानते थे।
धीरे-धीरे वे उत्तर भारत के सबसे प्रभावशाली क्रांतिकारी नेताओं में शामिल हो गए।
हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) की स्थापना में भूमिका
सन् 1924 में राम प्रसाद बिस्मिल ने सचिन्द्रनाथ सान्याल, योगेश चंद्र चटर्जी और अन्य क्रांतिकारियों के साथ मिलकर हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस संगठन का उद्देश्य ब्रिटिश शासन को समाप्त कर भारत में एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक गणराज्य की स्थापना करना था। बिस्मिल संगठन के प्रमुख रणनीतिकारों में से एक थे। उन्होंने नए सदस्यों को जोड़ने, संगठन का संविधान तैयार करने, वैचारिक दिशा निर्धारित करने और आवश्यक संसाधन जुटाने में सक्रिय योगदान दिया।
उनके नेतृत्व में HRA उत्तर भारत का सबसे प्रभावशाली क्रांतिकारी संगठन बन गया। आगे चलकर इसी संगठन ने काकोरी कांड जैसी ऐतिहासिक कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारी आंदोलन को नई पहचान और नई ऊर्जा प्रदान की।
राम प्रसाद बिस्मिल की जीवनी: काकोरी कांड, गिरफ्तारी, शहादत, साहित्यिक योगदान, विरासत और निष्कर्ष
काकोरी कांड की योजना
सन् 1924 में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) की स्थापना के बाद संगठन के सामने सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक संसाधनों की थी। क्रांतिकारी गतिविधियों, संगठन के विस्तार और प्रचार-प्रसार के लिए धन की आवश्यकता थी, जबकि ब्रिटिश सरकार हर प्रकार की क्रांतिकारी गतिविधि पर कड़ी निगरानी रख रही थी।
राम प्रसाद बिस्मिल ने अपने साथियों के साथ मिलकर यह योजना बनाई कि ब्रिटिश सरकार के सरकारी खजाने को ले जा रही रेलगाड़ी से धन प्राप्त किया जाए। उद्देश्य व्यक्तिगत लाभ नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन के लिए आवश्यक आर्थिक संसाधन जुटाना था। योजना को अत्यंत गोपनीय ढंग से तैयार किया गया और प्रत्येक सदस्य को उसकी जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से सौंप दी गई।
काकोरी कांड
9 अगस्त 1925 को लखनऊ के निकट काकोरी रेलवे स्टेशन के पास इस योजना को अंजाम दिया गया। इस कार्रवाई में राम प्रसाद बिस्मिल के साथ अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी, चंद्रशेखर आज़ाद, सचिन्द्रनाथ बक्शी, मन्मथनाथ गुप्त, मुकुन्दी लाल, केशव चक्रवर्ती और अन्य क्रांतिकारी शामिल थे।
क्रांतिकारियों ने सरकारी खजाने को अपने कब्ज़े में ले लिया। घटना के दौरान एक यात्री की गोली लगने से मृत्यु हो गई। अधिकांश ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार यह मृत्यु पूर्व नियोजित नहीं थी, बल्कि घटनाक्रम के दौरान हुई। इस घटना ने ब्रिटिश शासन को झकझोर दिया और पूरे देश में क्रांतिकारी आंदोलन की चर्चा तेज़ हो गई।
गिरफ्तारी
काकोरी कांड के बाद ब्रिटिश सरकार ने व्यापक स्तर पर जाँच शुरू की। कई महीनों तक चली खोज और गुप्त सूचनाओं के आधार पर अधिकांश क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
राम प्रसाद बिस्मिल भी 26 सितंबर 1925 को शाहजहाँपुर से गिरफ्तार कर लिए गए। गिरफ्तारी के बाद उन पर कड़ी निगरानी रखी गई और ब्रिटिश अधिकारियों ने उनसे संगठन के बारे में जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया।
हालाँकि उन्होंने अपने सिद्धांतों और साथियों के प्रति निष्ठा बनाए रखी तथा किसी भी प्रकार के दबाव के बावजूद क्रांतिकारी आंदोलन के साथ विश्वासघात नहीं किया।
मुकदमा
गिरफ्तारी के बाद राम प्रसाद बिस्मिल सहित कई क्रांतिकारियों पर काकोरी षड्यंत्र मुकदमा चलाया गया। यह उस समय के सबसे चर्चित राजनीतिक मुकदमों में से एक था।
ब्रिटिश सरकार ने इसे राजद्रोह और सरकारी संपत्ति पर हमले का गंभीर अपराध बताया। मुकदमे के दौरान बिस्मिल ने अत्यंत साहस और आत्मविश्वास का परिचय दिया। उन्होंने अपने विचारों और राष्ट्रभक्ति के सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं किया।
अंततः अदालत ने राम प्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह को मृत्युदंड सुनाया।
शहादत
19 दिसंबर 1927 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिला कारागार में राम प्रसाद बिस्मिल को फाँसी दे दी गई।
ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार उन्होंने अंतिम समय तक अद्भुत साहस, आत्मविश्वास और देशभक्ति का परिचय दिया। अपनी आत्मकथा और जेल से लिखे गए पत्रों में उन्होंने युवाओं से राष्ट्रसेवा, चरित्र निर्माण और संगठन की भावना बनाए रखने का संदेश दिया।
उनकी शहादत ने पूरे देश में गहरा प्रभाव डाला और अनेक युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ने की प्रेरणा मिली।
साहित्यिक योगदान
राम प्रसाद बिस्मिल केवल क्रांतिकारी ही नहीं, बल्कि एक प्रतिभाशाली लेखक, कवि और अनुवादक भी थे। उन्होंने हिंदी, उर्दू और अन्य भाषाओं में कई रचनाएँ लिखीं। उनकी आत्मकथा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ मानी जाती है।
वे अपनी कविताओं और लेखों के माध्यम से युवाओं में देशभक्ति और आत्मबल की भावना जगाते थे। लोकप्रिय कविता “सरफ़रोशी की तमन्ना” अक्सर उनके नाम से जोड़ी जाती है, लेकिन इसका मूल लेखन उर्दू शायर बिस्मिल अज़ीमाबादी ने किया था। राम प्रसाद बिस्मिल और अन्य क्रांतिकारियों ने इस कविता को स्वतंत्रता आंदोलन में व्यापक रूप से लोकप्रिय बनाया, जिसके कारण लंबे समय तक इसे उनके नाम से भी जोड़ा जाता रहा।
प्रमुख उपलब्धियाँ
- हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) के प्रमुख संस्थापक नेताओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- काकोरी कांड की योजना बनाने और उसके नेतृत्व में केंद्रीय भूमिका निभाई।
- युवाओं में राष्ट्रभक्ति और संगठन की भावना को मजबूत किया।
- क्रांतिकारी साहित्य और आत्मकथा के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन को वैचारिक आधार प्रदान किया।
- अपने बलिदान से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई प्रेरणा और ऊर्जा दी।
विरासत
राम प्रसाद बिस्मिल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे महान क्रांतिकारियों में गिने जाते हैं। उनका जीवन साहस, त्याग, राष्ट्रप्रेम और नैतिक दृढ़ता का प्रतीक है। उनकी और अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ की मित्रता भारतीय इतिहास में सांप्रदायिक सद्भाव और साझा राष्ट्रवाद के उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में याद की जाती है।

आज भी उनके सम्मान में अनेक विद्यालय, सड़कें, स्मारक और संस्थान स्थापित हैं। उनकी रचनाएँ, आत्मकथा और विचार नई पीढ़ी को देशभक्ति, चरित्र निर्माण और सामाजिक उत्तरदायित्व की प्रेरणा देते हैं।
1. राम प्रसाद बिस्मिल कौन थे?
उत्तर: राम प्रसाद बिस्मिल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी, कवि, लेखक और हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) के प्रमुख संस्थापक नेताओं में से एक थे। वे काकोरी कांड के मुख्य योजनाकारों में गिने जाते हैं।
2. राम प्रसाद बिस्मिल का जन्म कब हुआ था?
उत्तर: उनका जन्म 11 जून 1897 को हुआ था।
3. राम प्रसाद बिस्मिल का जन्म कहाँ हुआ था?
उत्तर: उनका जन्म शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ था।
4. राम प्रसाद बिस्मिल के माता-पिता कौन थे?
उत्तर: उनके पिता का नाम मुरलीधर और माता का नाम मूलमती देवी था।
5. राम प्रसाद बिस्मिल पर किसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ा?
उत्तर: उन पर आर्य समाज और स्वामी दयानंद सरस्वती की पुस्तक ‘सत्यार्थ प्रकाश’ का गहरा प्रभाव पड़ा, जिसने उनके राष्ट्रवादी और क्रांतिकारी विचारों को मजबूत किया।
6. राम प्रसाद बिस्मिल किस संगठन से जुड़े थे?
उत्तर: वे हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) के प्रमुख संस्थापक नेताओं में से एक थे।
7. हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) की स्थापना कब हुई?
उत्तर: HRA की स्थापना 1924 में हुई थी, जिसमें राम प्रसाद बिस्मिल की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
8. काकोरी कांड क्या था?
उत्तर: काकोरी कांड 9 अगस्त 1925 को सरकारी खजाने को ले जा रही ट्रेन से धन प्राप्त करने की एक क्रांतिकारी कार्रवाई थी, जिसका उद्देश्य स्वतंत्रता आंदोलन के लिए आर्थिक संसाधन जुटाना था।
9. काकोरी कांड कब हुआ था?
उत्तर: काकोरी कांड 9 अगस्त 1925 को लखनऊ के निकट काकोरी रेलवे स्टेशन के पास हुआ था।
10. काकोरी कांड के प्रमुख क्रांतिकारी कौन थे?
उत्तर: इस कार्रवाई में राम प्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ, चंद्रशेखर आज़ाद, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी, सचिन्द्रनाथ बक्शी, मन्मथनाथ गुप्त, मुकुन्दी लाल, केशव चक्रवर्ती और अन्य क्रांतिकारी शामिल थे।
11. राम प्रसाद बिस्मिल कब गिरफ्तार हुए थे?
उत्तर: उन्हें 26 सितंबर 1925 को शाहजहाँपुर से गिरफ्तार किया गया था।
12. काकोरी षड्यंत्र मुकदमा क्या था?
उत्तर: यह ब्रिटिश सरकार द्वारा काकोरी कांड में शामिल क्रांतिकारियों के विरुद्ध चलाया गया ऐतिहासिक मुकदमा था, जिसमें कई क्रांतिकारियों को कठोर दंड दिया गया।
13. राम प्रसाद बिस्मिल को फाँसी की सज़ा क्यों दी गई?
उत्तर: काकोरी षड्यंत्र मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद ब्रिटिश अदालत ने उन्हें मृत्युदंड सुनाया।
14. राम प्रसाद बिस्मिल को फाँसी कब दी गई?
उत्तर: उन्हें 19 दिसंबर 1927 को फाँसी दी गई।
15. राम प्रसाद बिस्मिल को कहाँ फाँसी दी गई?
उत्तर: उन्हें गोरखपुर जिला कारागार (उत्तर प्रदेश) में फाँसी दी गई।
16. राम प्रसाद बिस्मिल की आयु कितनी थी जब वे शहीद हुए?
उत्तर: वे लगभग 30 वर्ष के थे।
17. क्या राम प्रसाद बिस्मिल लेखक और कवि भी थे?
उत्तर: हाँ। वे एक उत्कृष्ट कवि, लेखक और अनुवादक थे। उनकी आत्मकथा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज़ मानी जाती है।
18. क्या “सरफ़रोशी की तमन्ना” कविता राम प्रसाद बिस्मिल ने लिखी थी?
उत्तर: नहीं। “सरफ़रोशी की तमन्ना” के मूल रचनाकार उर्दू शायर बिस्मिल अज़ीमाबादी थे। राम प्रसाद बिस्मिल और अन्य क्रांतिकारियों ने इस कविता को स्वतंत्रता आंदोलन में व्यापक रूप से लोकप्रिय बनाया, जिसके कारण इसे लंबे समय तक उनके नाम से भी जोड़ा जाता रहा।
19. राम प्रसाद बिस्मिल की प्रमुख उपलब्धियाँ क्या थीं?
उत्तर: HRA की स्थापना में प्रमुख भूमिका, काकोरी कांड का नेतृत्व, क्रांतिकारी संगठन को मजबूत करना, राष्ट्रवादी साहित्य की रचना और स्वतंत्रता संग्राम में सर्वोच्च बलिदान देना उनकी प्रमुख उपलब्धियाँ हैं।
20. राम प्रसाद बिस्मिल और अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ की मित्रता क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर: उनकी मित्रता भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में साझा राष्ट्रवाद, आपसी विश्वास और हिंदू–मुस्लिम एकता का प्रेरणादायक उदाहरण मानी जाती है।
21. राम प्रसाद बिस्मिल के जीवन से क्या सीख मिलती है?
उत्तर: उनका जीवन राष्ट्रप्रेम, साहस, अनुशासन, चरित्र निर्माण, संगठन, आत्मबल और सत्य के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा देता है।
22. राम प्रसाद बिस्मिल की विरासत क्या है?
उत्तर: उनकी विरासत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, क्रांतिकारी विचारधारा, राष्ट्रभक्ति और युवा प्रेरणा की है। उनकी रचनाएँ और विचार आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करते हैं।
23. इतिहास में राम प्रसाद बिस्मिल का स्थान क्या है?
उत्तर: वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे महान क्रांतिकारी नेताओं में गिने जाते हैं। काकोरी आंदोलन और HRA के विकास में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
24. आज राम प्रसाद बिस्मिल को कैसे याद किया जाता है?
उत्तर: भारत में उनके सम्मान में स्मारक, विद्यालय, सड़कें और विभिन्न संस्थान स्थापित हैं। उनकी जयंती और शहादत दिवस पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है तथा उनके विचारों और बलिदान को याद किया जाता है।
25. राम प्रसाद बिस्मिल आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा क्यों हैं?
उत्तर: क्योंकि उन्होंने कम आयु में ही राष्ट्रहित को सर्वोच्च स्थान दिया, अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया और स्वतंत्र भारत के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। उनका साहस, नेतृत्व, साहित्यिक योगदान और राष्ट्रप्रेम आज भी युवाओं को देश और समाज के लिए समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा देता है।
CONCLUSION
राम प्रसाद बिस्मिल का जीवन इस सत्य का प्रमाण है कि महान परिवर्तन केवल साहस से नहीं, बल्कि स्पष्ट विचार, अनुशासन, संगठन और राष्ट्र के प्रति पूर्ण समर्पण से संभव होते हैं। उन्होंने स्वतंत्र भारत का सपना देखा और उसे साकार करने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
यद्यपि वे स्वतंत्र भारत को अपनी आँखों से नहीं देख सके, लेकिन उनका बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की सबसे प्रेरणादायक गाथाओं में सदैव अमर रहेगा। उनका जीवन आज भी युवाओं को सत्य, साहस, आत्मबल और राष्ट्रसेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।