BJP History : जानें जनसंघ से मोदी तक, सरकार की उपलब्धियाँ, विवाद और 2047 के लक्ष्य। आसान भाषा में।
बीजेपी का जन्म – जनसंघ से लेकर अटल जी तक
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) आज देश की सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन इसका सफर छह अप्रैल 1980 को दिल्ली के कोटला मैदान से शुरू हुआ। पहले अध्यक्ष बने अटल बिहारी वाजपेयी। असल में बीजेपी की जड़ें भारतीय जनसंघ में हैं, जो 21 अक्टूबर 1951 को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बनाई थी। उन्होंने कश्मीर के स्पेशल स्टेटस (आर्टिकल 370) और तुष्टीकरण की राजनीति के खिलाफ आवाज उठाई।
1975 के इमरजेंसी के दौरान जनसंघ पर बैन लगा, हजारों कार्यकर्ता जेल गए। 1977 में इमरजेंसी हटी और सबने मिलकर जनता पार्टी बनाई। मगर 1980 में ‘डबल मेंबरशिप’ के विवाद (यानी आरएसएस की सदस्यता पर रोक) ने जनता पार्टी को तोड़ दिया। पुराने जनसंघी नेताओं ने अलग होकर भारतीय जनता पार्टी बना ली।एच2: पार्टी की विचारधारा – पांच सिद्धांत (पंचनिष्ठा) आसान भाजेपी पांच मूल सिद्धांतों पर चलती है, जिन्हें ‘पंचनिष्ठा’ कहते ला – नेशनलिज्म (राष्ट्रवाद) यानी देश पहले।
दूसरा – डेमोक्रेसी (लोकतंत्र) यानी जनता की

चुनावी जर्नी – 1984 से 2024 तक का रिकॉर्ड
बीजेपी का चुनावी सफर काफी दिलचस्प रहा। 1984 में उसे मात्र 2 सीटें मिली थीं – उसके इतिहास की सबसे बुरी हार। 1989 में 85, 1991 में 120, 1996 में 161 सीटों के साथ पहली बार सरकार बनी, लेकिन सिर्फ 13 दिन चली। 1998 में 182 सीटों पर सरकार बनी – यह 13 महीने चली। 1999 में फिर 182 सीटें मिलीं और अटल बिहारी वाजपेयी पूरे 5 साल पीएम रहे।
2014 में गेम बदल गया। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने अकेले 282 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया। 2019 में यह आंकड़ा 303 पर पहुंच गया। 2024 में बीजेपी को 240 सीटें मिलीं – वह सबसे बड़ी पार्टी तो रही, लेकिन गठबंधन के सहारे सरकार बनाई।
गरीबों के लिए योजनाएं:
● प्रधानमंत्री जन धन योजना – 50 करोड़ से अधिक बैंक अकाउंट खुले।
● उज्ज्वला योजना – 9 करोड़ से अधिक मुफ्त गैस कनेक्शन।
● आयुष्मान भारत – 50 करोड़ गरीबों को 5 लाख तक मुफ्त इलाज।
● प्रधानमंत्री आवास योजना – 4 करोड़ से अधिक पक्के मकान।
डिजिटल इंडिया ने यूपीआई को दुनिया का नंबर वन पेमेंट सिस्टम बना दिया। चंद्रयान-3 ने चांद के साउथ पोल पर भारत को पहुंचा दिया।
बीजेपी पर लगते हैं ये पांच बड़े आरोप
हर पार्टी की तरह बीजेपी भी विवादों से बची नहीं है। यहाँ बिना किसी पक्षपात के वो आरोप लिखे जा रहे हैं जो विपक्ष और क्रिटिक्स उठाते हैं:
1. इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम (चुनावी फंड): सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में इसे असंवैधानिक करार दिया। कहा गया कि इससे दानदाताओं के नाम छुपाने से पॉलिसी को पैसे के बदले बेचने की गुंजाइश बन गई। बीजेपी को इस स्कीम से सबसे अधिक फायदा हुआ।
2. एडानी और सरकार के करीबी रिश्ते: हिंडनबर्ग रिपोर्ट (2023) के बाद कांग्रेस ने ‘मोदी-अडानी’ कनेक्शन को मुद्दा बनाया। हालांकि SEBI ने एडानी को क्लीन चिट दी, लेकिन सवाल बने हुए हैं।
3. बेरोजगारी और महंगाई: सीएमआईई के आंकड़ों के अनुसार 2025 में युवा बेरोजगारी (15-29 आयु) 14-16% के आसपास रही। 40% ग्रेजुएट बेरोजगार हैं। महंगाई पर काबू पाने के दावों के बावजूद आम आदमी को राहत नहीं मिली।
4. किसान कानून (2020-21): तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का सबसे लंबा आंदोलन हुआ। सरकार को सारे कानून वापस लेने पड़े।
5. सेंसरशिप और प्रेस की आजादी: रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) के इंडेक्स में भारत की रैंकिंग गिरी है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार क्रिटिकल जर्नलिज्म को दबा रही है।
आगे क्या? विकसित भारत की चुनौतियाँ
बीजेपी ने 2047 तक भारत को ‘विकसित राष्ट्र’ बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए एआई, सेमीकंडक्टर, हाईवे और इंफ्रा पर भारी फोकस है। लेकिन मोदी के बाद का लीडरशिप, गठबंधन साझेदारों का मूड और युवाओं को रोजगार देना – ये तीन सबसे बड़ी चुनौतियाँ होंगी।
निष्कर्ष
बीजेपी ने भारत की राजनीति को पूरी तरह से बदल दिया है। उसने बुनियादी सुविधाओं, डिजिटल पेमेंट, स्पेस मिशन और विदेश पॉलिसी में बड़ी सफलता पाई है। लेकिन महंगाई, बेरोजगारी, इलेक्टोरल बॉन्ड विवाद और प्रेस पर दबाव जैसे मुद्दे उसके लिए लगातार सिरदर्द बने हुए हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी इन चुनौतियों से कैसे पार पाती है।